आइये आज मैं ऐसे शब्दों के आधुनिक अर्थ व परिभाषाएं बताता हूँ, जो भारतीय जनमानस के हृदय में बसता है, जिनके बिना भारतीय समाज का आस्तित्व नहीं

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क्या आप किसी ऐसे धर्म या सम्प्रदाय का सहयोग करते हैं जो अपने सम्प्रदाय के लोगों को अत्याचार, शोषण व भुखमरी से बचाता हो ?

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मुझे आज भी दिल्ली के अंडे के पराठें अवश्य याद आते हैं | सर्दियों के दिनों में ये पराठें मेरी पहली पसंद हुआ करती थी | लेकिन आज मैं इन परांठों के विषय में सोच भी नहीं सकता क्योंकि तब मेरा भगवा कलंकित हो जाएगा

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पत्थरों की प्रतिमाओं को भोग लगाने या उनपर लाखों लुटाने की बजाये, ईश्वर की अनुपम रचना यानि जीती जगती प्रतिमाओं पर भी कुछ धन लुटाओ, उन्हें भी कुछ भोग लगाओ, उनके जीवन को थोडा तो सरल बनाओ ?

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मेरे एक पोस्ट पर दो महत्वपूर्ण कमेंट्स आये थे जिनका उत्तर मैं विस्तार से देना चाहता था…पहले पोस्ट पढ़ लीजिये, फिर वे दो महत्वूर्ण कमेंट्स और फिर मेरा उत्तर…. कोई मुस्लिम मारा जाए भीड़ द्वारा तो मुस्लिम समाज चिंतित हो जाएगा लेकिन कोई मुस्लिम भूख…

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बचपन में फ़कीर या संन्यासी की रूपरेखा जो मेरे मन बस गयी थी, वह कुछ वैसा था जो सदैव प्रसन्नचित रहता है, हँसता, गाता, नाचता अपनी धुन में मगन रहता है | जब भी उनकी कोई तस्वीरें देखता तो ऐसा लगता था कि उनके जीवन…

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अक्सर हम सुनते हैं कि धर्म खतरे में हैं | गली मोहल्लों से लेकर विश्वस्तर पर धर्म रक्षक बने लुच्चे लफंगों की सेनाएं तैनात हो रहीं हैं | हर किताबी रट्टामार धार्मिक इस बात पर बहुत ही गंभीरता से विश्वास करता है कि धर्म खतरे…

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अक्सर हम सुनते हैं कि धर्म खतरे में हैं | गली मोहल्लों से लेकर विश्वस्तर पर धर्म रक्षक बने लुच्चे लफंगों की सेनाएं तैनात हो रहीं हैं | हर किताबी रट्टामार धार्मिक इस बात पर बहुत ही गंभीरता से विश्वास करता है कि धर्म खतरे…

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कई प्रयोग करते हुए निरंतर बढ़ा चला जा रहा हूँ, लेकिन मेरा प्रयोग केवल मेरे लिए है | मेरे अपने ही आध्यात्मिक उत्थान के लिए | बिलकुल वैसे ही जैसे कोई ऋषि बियाबान में ध्यान करता रहता है, मैं समाज में रहकर ध्यान कर रहा…

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साकार की उपासना तो समझ में आती है मुझे | क्योंकि जो प्रत्यक्ष आपकी सहायता करता है उसकी उपासना या सम्मान स्वाभाविक है | जैसे कि सूर्य की उपासना, चन्द्र की उपासना, नदी, वृक्ष, पहाड़, खेतों की उपासना | ये सभी जीवन दायी हैं |…

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