कई प्रयोग करते हुए निरंतर बढ़ा चला जा रहा हूँ, लेकिन मेरा प्रयोग केवल मेरे लिए है | मेरे अपने ही आध्यात्मिक उत्थान के लिए | बिलकुल वैसे ही जैसे कोई ऋषि बियाबान में ध्यान करता रहता है, मैं समाज में रहकर ध्यान कर रहा…

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साकार की उपासना तो समझ में आती है मुझे | क्योंकि जो प्रत्यक्ष आपकी सहायता करता है उसकी उपासना या सम्मान स्वाभाविक है | जैसे कि सूर्य की उपासना, चन्द्र की उपासना, नदी, वृक्ष, पहाड़, खेतों की उपासना | ये सभी जीवन दायी हैं |…

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विद्वान लोग कहते हैं कि वेदों में कहा है, क़ुरान में कहा है, दुनिया के सभी आसमानी और हवाई किताबों में कहा गया है कि साकार को पूजना मूर्खता है, अन्धविश्वास है | लोगों का कहना है कि निराकार का कोई साकार रूप हो ही नहीं सकता…

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अक्सर देखता हूँ कि आध्यात्म और धर्म के नाम पर समाज दोहरी मानसिकता रखता है | जब भी आध्यात्म या धार्मिकता की बात आती है, तब समाज का व्यव्हार बिलकुल अलग होता है और जब विज्ञान व्यवहार की बात आती है तो बिलकुल अलग |…

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दुनिया का कोई भी किताबी मजहब या धर्म अन्धविश्वास के विरुद्ध नहीं है | क्योंकि सभी धर्मों, मजहबों में एक अंधविश्वास बहुत प्रभावी है और वह है निराकार की उपासना | उस काल्पनिक ईश्वर की उपासना करना जिसे न किसी ने देखा, न जाना, न…

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“गुरु जी आखिर हम इन्सानों की जिंदगी का मक़सद किया है ? हर धर्म की अपनी ही ढपली है | तमाम धर्म की बुनयाद डर और लालच पर रखी गई है। जो समझ से परे है। डर “” नर्क,दोज़ख़, लालच “”” अप्सरा, हूर, वह भी…

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 मैं शायद ऐसा व्यक्ति हूँ जो कभी किसी की समझ में नहीं सकता क्योंकि मैं अंधों की उस दुनिया में रहता हूँ जिसके लिए हाथी को समग्रता से देख व समझ पाना लगभग असंभव होता है | कोई हाथी को उसके पैर से जानता है…

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एक बहुत ही बड़ा भ्रम पाल लिया है पढ़े-लिखों ने कि भौतिक सुख ही वास्तविक सुख है और बाकी सभी कुछ भ्रम है मिथ्या है | इनको लगता है कि इंसानों ने जो आविष्कार किये वे ही जीवन दायिनी हैं, बाकि सभी कुछ व्यर्थ |…

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मेरे एक मित्र श्री D.r. Godara जी ने इस पुस्तक के विषय में जानकारी दी और मुझसे अपनी राय व्यक्त करने का आग्रह किया | मैंने पुस्तक के कुछ अंश पढ़े, लेकिन पूरी नहीं पढ़ी | फिर भी मैं इतना तो समझ ही चुका था कि पुस्तक के लेखक गोकुलजी, बहुत ही सुलझे विचारों वाले, पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं |

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लोग जो समय रोज़े, नमाज़,संध्‍या-पूजा और प्रार्थना में नष्ट करते हैं, उसे यदि समाज के किसी उपयोगी काम में लगावें, तो अपने भाइयों का अपना बहुत कल्याण कर सकते हैं। यदि संसार से ईश्वर और धर्म के व्यर्थ गपोड़े मिट जायँ, तो लोगों में फ़ैले…

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