डिग्रियाँ प्राप्त कर लेने मात्र से कोई शिक्षित नहीं हो जाता, शिक्षित होने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है | और गुरु का डिग्रीधारी होना अनिवार्य नहीं होता, क्योंकि जीवन की शिक्षा डिग्रियों से नहीं, अनुभवों से प्राप्त होती है |

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किसी की नजर में मुफ्तखोर तो किसी की नजर में हरामखोर तो किसी की नजर में समाज और देश पर बोझ होते हैं संन्यासी

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[KGVID width=”400″ height=”224″]https://www.vishuddhablog.com/wp-content/uploads/2018/11/बुध्द-भीख-क्यों-मांगते-थे.mp4[/KGVID] संन्यासी का मुख्य कर्म होता है स्वयं को जागृत करना और उसके पश्चात समाज को जागृत करना | यदि सभी संन्यासी रामदेव या श्री श्री रविशंकर की तरह व्यवसायी बन जाएँ, या नौकरी करने लगें या खेती करने लगें, तो वे अपने…

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नघालॉह डॉर ने ग्रामीण मार्केटिंग की एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जहां लोगों को अपना सामान बेचने के लिए बिचौलिए की जरूरत नहीं है. दुकान पर सेल्समैन रखने या कहें कि खुद बैठने की जरूरत नहीं है और फायदा पूरा है. यहां जो समय बचता है उसे दुकान के मालिक खेतों में ही बिताना पसंद करते हैं.

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स्वयं की उपेक्षा मत कीजिए::: स्वयं ही स्वयं का आदर कीजिए ::::दूसरों के साथ भी प्रेमपूर्ण बर्ताव कीजिए

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आदिवासी यौन कुंठित नहीं होते, पशु-पक्षी यौन कुंठित नहीं होते, यहाँ तक कि कीट पतंगे भी यौन कुंठित नहीं होते, केवल नैतिकता, सभ्यता, धार्मिकता की दुहाई देने वाला सभ्य कहलाने वाला समाज ही यौन कुंठित होता है | और यौन कुंठित समाज अप्राकृतिक यौन संबंधों का कारक है

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भाग्य

मैं ऐसे लोगों से दूरी बना लेता हूँ जो केवल दूसरों की बुराई करने में ही अपना जीवन नष्ट करते हैं | मैं ऐसे लोगों से भी दूरी बना लेता हूँ, जो दिन रात अभावों, आर्थिक तंगी का रोना लिए बैठे रहते हैं | क्योंकि ऐसे लोग अपने ही भाग्य के दुश्मन होते हैं और ऐसे लोगों की संगत, आपके अपने भाग्य को प्रभावित करती है

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“गुरू जी एक बात बताइये ?क्या उस स्थान का शुद्धिकरण करना उचित है, जहाँ हाल ही में कोई परिवार रह कर गया हो ? विशुद्ध चैतन्य जी, अगर उचित है तो फिर अगर में नेता हु तो मुझे भी शुद्धिकरण कराना चाहिए ? हाँ स्थान…

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क्या कभी आपने सोचा है कि दुनिया का सबसे विद्वान व्यक्ति भी केवल उतना ही जानता है, जितना उसने पढ़ा, देखा या जाना है ? लेकिन उसे अहंकार हो जाता है कि वह सबकुछ जानता है और आश्चर्य तो उनपर मुझे अधिक होता है, जो…

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वास्तव में वह व्यक्ति सबसे खतरनाक है जो जागृत है, चैतन्य है, होश में है | ऐसे व्यक्ति से समाज, सत्ता को सर्वाधिक खतरा रहता है क्योंकि उसे भेड़ों की तरह हाँका नहीं जा सकता, उसे जुमले/लोरी/लोलिपॉप से बहलाया नहीं जा सकता | उसे धर्म…

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