हमारा ज्ञान रटा हुआ है, न कि जिया हुआ। हमने अनुभव नहीं किया बस हमने पढ़ा या सुना और हमें ठीक लगा तो हमने उसे याद कर लिया और हमें लगा कि हमें ज्ञान हो गया लेकिन वास्तव में हमें ज्ञान नहीं हुआ बल्कि ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग की जानकारी भर हो गई।

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उन्होंने छुआ-छूत और ब्राहमण व शूद्रों के लिए अलग अलग बैठकर प्रसाद लेने की परम्परा बंद करवा दी और सभी को एक ही साथ बैठकर बिना कोई भेद-भाव प्रसाद लेने की परम्परा को लागू किया

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शम्स तबरेज का पूरा नाम हज़रत मुहम्मद बिन मलिक-दाद मुलक्कब ब-शेख शम्सुद्दीन तबरेजी था | मौलाना रूम का नाम आते ही खुद ब खुद शम्स तबरेज का नाम भी उसमें जुड़ जाता है | शम्स हर वक़्त पर्यटन करते रहते थे , एक शहर से…

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“मैं भौतिक और अध्यात्मिक जगत के बीच सेतु बनाना चाहता हूँ |” -ठाकुर दयानन्द देव (१८८१-१९३७) यही एक लाइन थी, जिसने मुझे इनके आश्रम में खींच लिया क्योंकि यही है सच्ची शिक्षा और जो ऐसा कह सकता है, वही सही मायने में सही गुरु है…

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नास्तिक का अर्थ है—जो नहीं को जीवन का आधार बना ले, जो नकार को जीवन की शैली बना ले। नास्तिक का अर्थ वैसा नहीं है जैसा साधारणत: समझा जाता है। साधारणत: समझा जाता है जो ईश्वर को इनकार करे वह नास्तिक। वह परिभाषा मूलत: गलत…

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मैं खड़ा हूं ?—अजीब बात है, इस समय तो मैं आराम कर रहा हूं—मेरा मतलब है अपनी स्मृति में मैं मस्‍तो कि साथ खड़ा हूं। निश्‍चित ही तो ऐसा कोई और नहीं है जिसके साथ मैं खड़ा हो सकता हूं। मस्‍तो के बाद दूसरे किसी…

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“When you go through a hard period, When everything seems to oppose you, … When you feel you cannot even bear one more minute, NEVER GIVE UP! Because it is the time and place that the course will divert!” “Sorrow prepares you for joy. It…

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सूर्य की आराधना करती एक आदिवासी कन्या |  “तुम जो हो अभी, उधारहो, नगद नहीं। कृत्रिम हो। दूसरों ने तुम पर कुछ रंग दिया है; अभी तुमने अपना रंग जाना नहीं। तुम्हारे चेहरे पर दूसरों ने मुखौटे लगा दिये हैं और आईनों के सामने खड़े…

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प्रश्न: भगवान, हमें जो आपमें दिखाई पड़ता है, वह दूसरों को दिखाई नहीं पड़ता। ऐसा क्यों है भगवान? क्या जन्मों-जन्मों में ऐसा कुछ अर्जन करना होता है? एक-एक व्यक्ति की अलग-अलग यात्रा है, अलग-अलग रुझान है, अलग-अलग दृष्टि है। किसी को संगीत प्यारा लगता है,…

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एक बार राबिया बीमार थी। सहानुभूति में दो फकीर देखने आये। एक थे हसन और दूसरे मलिक। हसन ने कहा : ‘राबिया, अल्लाह जो भी सजा दे, फकीर को कोई शिकायत नहीं होती। वह उसे चुपचाप सह लेता है।’ फिर मलिक बोले : राबिया फकीर…

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