आदिवासी यौन कुंठित नहीं होते, पशु-पक्षी यौन कुंठित नहीं होते, यहाँ तक कि कीट पतंगे भी यौन कुंठित नहीं होते, केवल नैतिकता, सभ्यता, धार्मिकता की दुहाई देने वाला सभ्य कहलाने वाला समाज ही यौन कुंठित होता है | और यौन कुंठित समाज अप्राकृतिक यौन संबंधों का कारक है

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बरसाती राष्ट्रभक्ति का दौर शुरू हुए लगभग तीनवर्ष बीत चुके हैं | इस दौर में हमने कई दोगले राष्ट्रभक्त और उनकी दोगली राष्ट्रभक्ति देखी | हमने देखा कि मिडिया में जो लोग बैठे है, जिनको आज के युवावर्ग विद्वान, समझदार और सुलझा हुआ समझती थी,…

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भारत में जितने भी त्यौहार हैं, वे सभी किताबों पर आधारित नहीं हैं, कुछ प्राकृतिक वातावरण पर आधारित हैं | जैसे; दीवाली, वसंतोत्सव, होली, रक्षाबंधन, तीज, श्रावणी… आदि | मुझे याद है बचपन में जब हम गाँव की रामलीला देखने जाया करते थे, तो कम्बल…

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मानवों ने जहाँ जहाँ अपनी विकासशील आधुनिक मानसिकता के कदम नहीं रखे, वह जगह आज भी सुंदर व मनमोहक हैं | लेकिन जहाँ-जहाँ मानवों की भीड़ पहुँच जाती है वह विकास व आधुनिकता की वेदी पर स्वाहा हो जाता है | अभी भी भारत में…

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क्या आपने कभी गौर किया है कि भारत में सभी हवाई जहाजों के विंग्स और बॉडी पर VT से शुरू होने वाला नाम प्रमुखता से लिखा होता है. असम में भारत के हर हवाई जहाज का नाम VT से ही शुरू होता है. लेकिन ये…

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जरा गिरेबान पर झाँक लो एक बार पता चल जाएगा कि अपनी ही उन धार्मिक सिद्धांतों, गुरुओं के दिखाए आदर्शों के विरुद्ध हो गये हो सभी, जिनके नाम पर इतना इतरा रहे हो | याकूब दोषी था या निर्दोष, यह तो अदालत ही जानती है…

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एक अकेला चंदू पूरे गाँव के लिए कुआँ खोद कर पानी निकाल सकता है, लेकिन हम सवा सौ करोड़ लोग मुट्ठी भर नेताओं के भरोसे बैठे हैं !!!Posted by विशुद्ध चैतन्य on Tuesday, April 29, 2014 581 total views, no views today

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बहुत ही दुःख की बात है कि भारत आज भी अंग्रेजों का गुलाम है | आज भी अंग्रेजी से मुक्त नहीं हो पाया | आज भी न्याय व्यवस्था…Posted by विशुद्ध भारतीय on Tuesday, April 29, 2014 645 total views, no views today

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