आपके खून पसीने की मेहनत से खड़ी की कम्पनी कुछ ही दिनों बाद आपकी नहीं रह जाती, बल्कि आप खुद उस कम्पनी के नौकर बनकर रह जाते हैं…..क्या आप इसे कम्पनी और स्वयं का उत्थान कहेंगे ?

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आपसे कहा जाता है कि जो पूर्वजों ने अपने अनुभवों से लिखा या कहा वही सही है और आप अपने अनुभवों से जो कुछ भी जानते समझते हैं वह गलत | इसका अर्थ तो यह हुआ कि प्राचीन काल के लोग हमसे अधिक बुद्धिमान व विद्वान थे ? इसका अर्थ तो यह हुआ कि उन्होंने जितना जाना, समझा, उससे आगे की यात्रा हमने की ही नहीं, उन प्राचीनकालीन विद्वानों के लेवल तक भी नहीं उठ पाए, बल्कि उस लेवल पर ही टिके रह गये, जिस लेवल के लोगों को वे विद्वान समझा रहे थे ?

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मुझे आज भी दिल्ली के अंडे के पराठें अवश्य याद आते हैं | सर्दियों के दिनों में ये पराठें मेरी पहली पसंद हुआ करती थी | लेकिन आज मैं इन परांठों के विषय में सोच भी नहीं सकता क्योंकि तब मेरा भगवा कलंकित हो जाएगा

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भ्रष्ट नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों में कोई आपका रिश्तेदार होगा, कोई अपनी जात, धर्म, पार्टी या गाँव का होगा । अब अपनों का बहिष्कार भला कोई कर सकता है ?

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बचपन में एक गीत बहुत पसंद था मुझे, ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ | जब भी गाँव में कोई धार्मिक या वैवाहिक समारोह होता था, तो लाउडस्पीकर मंगवाया जाता और यह गीत अवश्य बजता था और दिन में कई बार बजता था | मैंने कभी गंगा…

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उनको प्राप्त मान-सम्मान सभी को आकर्षित करता था और स्वाभाविक रूप से आस-पड़ोस के लोग ब्राह्मण के पुत्र को ब्राह्मण ही पुकारते थे क्योंकि वह पुत्र भी अपने माता-पिता की तरह ही विश्वसनीय व कर्त्तव्यनिष्ठ होगा यही धारणा होती थी | लेकिन यही मान्यता आगे चलकर घातक सिद्ध हुई

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अब समस्या यह हो जाती है कि लोग कहते हैं कि यदि ईश्वर आपके साथ है, आपके ही भीतर है तो कोई चमत्कार दिखाओ, या फिर कोई प्रमाण दिखाओ जिससे हमें विश्वास हो जाए कि आप सही कह रहे हो

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भाग्य

मैं ऐसे लोगों से दूरी बना लेता हूँ जो केवल दूसरों की बुराई करने में ही अपना जीवन नष्ट करते हैं | मैं ऐसे लोगों से भी दूरी बना लेता हूँ, जो दिन रात अभावों, आर्थिक तंगी का रोना लिए बैठे रहते हैं | क्योंकि ऐसे लोग अपने ही भाग्य के दुश्मन होते हैं और ऐसे लोगों की संगत, आपके अपने भाग्य को प्रभावित करती है

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द्रोणाचार्य, भीष्म के शिष्य कौरव भी थे और पांडव भी । लेकिन दोनों ही पक्ष ने शिक्षा अपनी अपनी योग्यतानुसार ही प्राप्त की । वास्तव में गुरु आपको वह सिखाता है, जो शिक्षक, अध्यापक, टीचर, ट्यूटर नहीं सिखा पाते । गुरु आपको किताबी ज्ञान या…

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अपना नेता यह देखकर मत चुनिए कि वह नौलखा सूट पहनता है, तीसहज़ारी सब्जी खाता है, सवा लाख के पेन से सिग्नेचर करता है……बल्कि यह देखकर चुनिए कि उसमें न्याय करने की योग्यता है या नहीं

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