द्रोणाचार्य, भीष्म के शिष्य कौरव भी थे और पांडव भी । लेकिन दोनों ही पक्ष ने शिक्षा अपनी अपनी योग्यतानुसार ही प्राप्त की । वास्तव में गुरु आपको वह सिखाता है, जो शिक्षक, अध्यापक, टीचर, ट्यूटर नहीं सिखा पाते । गुरु आपको किताबी ज्ञान या…

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अपना नेता यह देखकर मत चुनिए कि वह नौलखा सूट पहनता है, तीसहज़ारी सब्जी खाता है, सवा लाख के पेन से सिग्नेचर करता है……बल्कि यह देखकर चुनिए कि उसमें न्याय करने की योग्यता है या नहीं

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बचपन में फ़कीर या संन्यासी की रूपरेखा जो मेरे मन बस गयी थी, वह कुछ वैसा था जो सदैव प्रसन्नचित रहता है, हँसता, गाता, नाचता अपनी धुन में मगन रहता है | जब भी उनकी कोई तस्वीरें देखता तो ऐसा लगता था कि उनके जीवन…

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संन्यास एक ऐसी अवस्था होती है, जहाँ पहुंचकर आप वह सब देख व समझ पाते हैं, जो समान्य जीवन जीते हुए नहीं समझ पाते | हम यह कभी चिन्तन नहीं कर पाते अपनी दैनिक जीवन के उलझनों में कि समाज हमेशा समर्थ की सहायता को…

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कई प्रयोग करते हुए निरंतर बढ़ा चला जा रहा हूँ, लेकिन मेरा प्रयोग केवल मेरे लिए है | मेरे अपने ही आध्यात्मिक उत्थान के लिए | बिलकुल वैसे ही जैसे कोई ऋषि बियाबान में ध्यान करता रहता है, मैं समाज में रहकर ध्यान कर रहा…

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सुसंस्कृत, सभ्य, धार्मिक व पढ़े-लिखे समाज को जब मैं देखता हूँ तो मुझे ऐसा लगता है कि ये लोग मेरे लिए अजनबी हैं | ये लोग मुझे कभी भी अपने जैसे नहीं लगते, बहुत गैर लगते हैं | शायद यही कारण रहा कि मैं इनसे…

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 मैं शायद ऐसा व्यक्ति हूँ जो कभी किसी की समझ में नहीं सकता क्योंकि मैं अंधों की उस दुनिया में रहता हूँ जिसके लिए हाथी को समग्रता से देख व समझ पाना लगभग असंभव होता है | कोई हाथी को उसके पैर से जानता है…

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न तो कोई स्त्री अधिक समय तक अच्छी लगती है भले ही कितनी सुंदर क्यों न हो, न ही कोई रिश्ते अच्छे लगते हैं | बस वही लोग अच्छे लगते हैं, जिनके सामने आपको मुखौटा लगाकर न रहना पड़े

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