क्या भ्रष्टाचारियों, रखैल मीडिया और हत्यारी भीड़ का आचरण ही हिन्दू-धर्म है ?

हज़ार वर्ष पहले जिस प्रकार ऐसी ही मानसिकता के लोगों ने देश को विदेशियों के हाथों बेच दिया, उन्हें समर्थन देकर क्या आप पुनः यह सिद्ध करना चाहते हैं कि हिन्दुओं के पास बुद्धि-विवेक का आभाव है ?

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जिन्हें धर्म की ही समझ नहीं वे भला सनातन धर्म को क्या समझेंगे ?

मैं सनातनी हूँ इसलिए साम्प्रदयिक संकीर्णताओं से मुक्त हूँ । मैं जिस विराट रूप में विश्व को देख व समझ पाता हूँ, उस रूप में कोई किताबी धार्मिक या दड़बों में कैद धार्मिक नहीं देख पाता । उनकी दुनिया तो उनके अपने दड़बे में ही सिमट कर रह जाती है ।गें

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फिर भी खुद को धार्मिक, सात्विक कहते हो…..??

मुझे आज भी दिल्ली के अंडे के पराठें अवश्य याद आते हैं | सर्दियों के दिनों में ये पराठें मेरी पहली पसंद हुआ करती थी | लेकिन आज मैं इन परांठों के विषय में सोच भी नहीं सकता क्योंकि तब मेरा भगवा कलंकित हो जाएगा

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अहिंसक संन्यासी

वे भी सब चिल्लाने लगे कि ये देशद्रोही है, पाकिस्तानी है…और संन्यासी की तरफ लाठी, डंडा लेकर दौड़ पड़े

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धर्म और रिलिजन में बहुत बड़ा अंतर है

यदि आप हिन्दू हैं, आप मुस्लिम हैं, आप सिख हैं, आप ईसाई हैं, तो यह आपके पंथ या संप्रदाय का परिचय है न कि आपकी धार्मिकता का | ~विशुद्ध चैतन्य

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जहाँ देखो ढोंगी-पाखंडियों का बोलबाला है

बचपन में ही मुझे अपने माता-पिता से व्यवहारिक ज्ञान ही मिला, न कि किताबी ज्ञान | वे यदि ध्यान, पूजा-पाठ के विषय में भी समझाते तो उसे तर्कपूर्ण तरीके से समझाते, न कि यह कहते कि किताबों में लिखा है… Read moreजहाँ देखो ढोंगी-पाखंडियों का बोलबाला है

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वे इस बात की परवाह नहीं करते कि दुनिया क्या कहेगी

“Care about what other people think and you will always be their prisoner.” – Lao Tzu – कोई क्या कहेगा, क्या सोचेगा….इन सबकी चिंता करने वाले कभी भी सफल नहीं हो पाते, क्योंकि वे मानसिक रूप से उनके गुलाम हो… Read moreवे इस बात की परवाह नहीं करते कि दुनिया क्या कहेगी

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ध्यान का अर्थ है स्वयं के भीतर उतरना और अनुभव करना अद्वैत को

प्रार्थना और मैडिटेशन में जो सबसे बड़ा अंतर है वह यह कि प्रार्थना में ईश्वर को स्वयं से अलग माना जाता है और मैडिटेशन में …Posted by विशुद्ध चैतन्य on 18 अगस्त 2014 744 total views, no views today

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