अधिकांश गरीब अपने भाग्य को दोष देते हैं, सरकार और समाज को कोसते हैं और रोते-कलपते जीवन गुजारते हैं या फिर किसी नेता-बाबा का दुमछल्ला बन जाते हैं या फिर अपराध जगत में कदम रख देते है |

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डिग्रियाँ प्राप्त कर लेने मात्र से कोई शिक्षित नहीं हो जाता, शिक्षित होने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है | और गुरु का डिग्रीधारी होना अनिवार्य नहीं होता, क्योंकि जीवन की शिक्षा डिग्रियों से नहीं, अनुभवों से प्राप्त होती है |

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Definition of Humanity

किसी को लगता है कि उसका मजहब ही मानवता सिखाता है और बाकी सभी मजहब पशुता या दानवता सिखाते हैं | किन्तु परिभाषा किसी को नहीं पता |

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बीबीसी न्यूज़ की एक हेडिंग; चीन की ऐसी ‘जेल’ जहां बंद हैं दस लाख मुसलमान? पर नजर पड़ी तो सहसा ही स्क्रोल करते-करते ठहर गया. पूरा लेख पढकर और कुछ खोजबीन की तो और भी कई लेख मिले इसी विषय से सम्बंधित | उन्हें भी…

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त्यागी, बैरागी, करोड़पति, अरबपति साधू-संतों की तरह धन, स्त्री, ऐश्वर्य, भौतिक सुखों को अछूत नहीं मानता हूँ मैं | न ही त्यागी बैरागी साधू-संतों की तरह धन को हाथ नहीं लगाता स्वयं अपितु उसके लिय सेक्रेटरी, या सेवक रखता हूँ |

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आदिवासी यौन कुंठित नहीं होते, पशु-पक्षी यौन कुंठित नहीं होते, यहाँ तक कि कीट पतंगे भी यौन कुंठित नहीं होते, केवल नैतिकता, सभ्यता, धार्मिकता की दुहाई देने वाला सभ्य कहलाने वाला समाज ही यौन कुंठित होता है | और यौन कुंठित समाज अप्राकृतिक यौन संबंधों का कारक है

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पत्थरों की प्रतिमाओं को भोग लगाने या उनपर लाखों लुटाने की बजाये, ईश्वर की अनुपम रचना यानि जीती जगती प्रतिमाओं पर भी कुछ धन लुटाओ, उन्हें भी कुछ भोग लगाओ, उनके जीवन को थोडा तो सरल बनाओ ?

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“वह कैसा मजनू था जो लैला पर आशिक हो गया | मैं भी कैसा अजीब हूँ कि अपने आप पर आशिक हो गया | जब मैंने अपने अन्दर नज़र की तो सिवाय खुदा के मुझे कुछ न दिखा |”

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