कुम्भमेला का बहुत ही महत्व है और विशेषकर मौनी अमावस्या स्नान का | एक धारणा बना दी गयी है कि मौनी अमावस्या के स्नान से अश्वमेघ यज्ञ से दोगुना फल प्राप्त होता है | उसपर गंगा स्नान से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है…

संन्यास की अवधारणा पश्चिम में विकसित नहीं हो पायी, क्योंकि संन्यास को समझने के लिए जिस उच्च मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है, जिस मुक्तता व स्वतंत्रता के भाव की आवश्यकता होती है, वह विकसित नहीं हो पायी थी पश्चिम में तब तक | लेकिन…

बड़े गर्व से कहते सुनता हूँ लोगों से, “हम तो फलाने के भक्त हैं…..हम तो फलाने के अनुयायी हैं….!” लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आप वास्तव में भक्त या अनुयायी हैं भी या नहीं ?? चलिए मान लेते हैं कि आप किसी नेता…

रिलीजन कभी भी धर्म नहीं हो सकता, क्योंकि प्रत्येक रिलीजन में भले और बुरे लोग होते हैं | रिलिजन केवल मिश्रित समूह है भयभीत व स्वार्थी अच्छे व बुरे लोगों का |

सभी मत-मान्यताओं, कर्मकांडों, रहन-सहन, ईष्टों और आराध्यों से मिलकर जो धर्म बना वही हिन्दू धर्म कहलाया और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड जिन नियमों और धर्मों को अपनाकर सहजता से आपसी समन्वय बनाये हुए हैं, उसे हम सनातन के नाम से जानते हैं |

सदैव स्मरण रखें: यदि सारे हिन्दू मुसलमान हो जाएँ या सारे मुसलमान हिन्दू हो जाएँ, तब भी धर्म खतरे में नहीं पड़ेगा | धर्म खतरे में पड़ता है जब कोई धार्मिक व्यक्ति अधार्मिक हो जाए | अर्थात जब कोई धार्मिक व्यक्ति धर्मांतरण कर अधर्म को…

Beauty of nature

स्वार्थी लोगों की जेब से पैसे ऐंठने के लिए मंदिर से बेहतर कोई और उपाय शायद नहीं दिखता इन धर्मों के ठेकेदारों को

सनातनी या धर्म निरपेक्ष होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि साम्प्रदायिकता को यहाँ स्वीकार नहीं किया जायेगा | जो भी साम्प्रदायिकता फैलाएगा, उसके विरुद्ध आवश्यक कदम उठाये जायेंगे

साम्प्रदायिकों की भीड़ सबसे बड़ी दिखाई देगी जब भी कहीं कोई मंदिर-मस्जिद का खेल चल रहा हो, जब भी कहीं कोई धार्मिक दिखावा व ढोंग का कार्यक्रम चल रहा हो

तो फिर प्रश्न उठता है कि जब कर्म धर्म नहीं है, रीतिरिवाज, धर्म नहीं है, पूजा-पाठ धर्म नहीं है, कर्त्तव्य धर्म नहीं है तो फिर धर्म है क्या ?

किसी की नजर में मुफ्तखोर तो किसी की नजर में हरामखोर तो किसी की नजर में समाज और देश पर बोझ होते हैं संन्यासी

हज़ार वर्ष पहले जिस प्रकार ऐसी ही मानसिकता के लोगों ने देश को विदेशियों के हाथों बेच दिया, उन्हें समर्थन देकर क्या आप पुनः यह सिद्ध करना चाहते हैं कि हिन्दुओं के पास बुद्धि-विवेक का आभाव है ?