सनातनी या धर्म निरपेक्ष होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि साम्प्रदायिकता को यहाँ स्वीकार नहीं किया जायेगा | जो भी साम्प्रदायिकता फैलाएगा, उसके विरुद्ध आवश्यक कदम उठाये जायेंगे

किसी की नजर में मुफ्तखोर तो किसी की नजर में हरामखोर तो किसी की नजर में समाज और देश पर बोझ होते हैं संन्यासी

हज़ार वर्ष पहले जिस प्रकार ऐसी ही मानसिकता के लोगों ने देश को विदेशियों के हाथों बेच दिया, उन्हें समर्थन देकर क्या आप पुनः यह सिद्ध करना चाहते हैं कि हिन्दुओं के पास बुद्धि-विवेक का आभाव है ?

यदि आप हिन्दू हैं, आप मुस्लिम हैं, आप सिख हैं, आप ईसाई हैं, तो यह आपके पंथ या संप्रदाय का परिचय है न कि आपकी धार्मिकता का | ~विशुद्ध चैतन्य

ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर हिन्दू संप्रदाय के कूद पड़ने से और विशेषकर संघियों के कूदने से मुस्लिम समुदाय आहत हैं | अब यह स्वाभाविक ही है कि जब कोई आहत होता है तो वह सही गलत नहीं देखता, दूसरों को कैसे आहत किया जाए…

मैं जब ब्रॉडकास्ट मीडिया में काम करता था, तब वहां कभी कोई भेदभाव देखने नहीं मिला कि कोई हिन्दू है, मुस्लिम है शूद्र है, ब्राह्मण है… आदि इत्यादि | लेकिन एक प्रोड्यूसर मुझे मिली जिसका मानना था कि उसे मीन राशि वालों से नफरत है…

आपने देखा होगा कि जब भी कोई शव यात्रा निकलती है तो मार्ग में खड़े लोग थोड़ी देर ठहर जाते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते है। यह हिन्दू धर्म का एक प्रमुख नियम है जिसके अनुसार शवयात्रा को देखने के बाद हमें मृत आत्मा…

न तो गौतम बुद्ध निकले थे गरीबों की सेवा करने और न ही महावीर और न ही ओशो | इन सभी ने केवल मार्ग दिखाया, जो आगे बढ़ना चाहते थे वे बढ़ गये, जो भीख और दान की आस में बैठे थे, वे बैठे रह…

यह लेख जो लिखने जा रहा हूँ, कई लोगों की भावनाएँ आहत करेंगी इसलिए कमजोर भावनाओं वाले इस लेख को न पढ़ें | पिछले कुछ दिनों से मैं लगातार माँसाहार विरोधी पोस्ट देख रहा हूँ और बड़े ही तर्कपूर्ण तरीके से इसे धर्म, पाप-पुण्य, और…

सभी के लिए नववर्ष मंगलमय हो !, वर्ष २०१५ सम्पूर्ण विश्व के लिए धार्मिक उन्मादियों, आतंकियों व दंगाइयों से मुक्ति व आपसी प्रेम-विश्वास व सहयोगिता का वातावरण लेकर आये !! ~विशुद्ध चैतन्य 0

Aham Brahmasmi is a Sanskrit sutra whose English translation is “the core of my being is the ultimate reality, the root and ground of the universe, the source of all that exists.” When we repeat this sutra and let it resonate deep within, we expand…

कभी मैं प्रकृति के नियमों और मानव निर्मित नियमों में तुलना करता हूँ, तो मुझे प्रकृति के नियम मानवनिर्मित नियमों से हमेशा श्रेष्ठ व परिपक्व लगे | प्रकृति से गलती बहुत ही कम होती है और नियम उसने एक बार जो तय कर दिया तो…