कम से कम कोई एक ग्रन्थ तो ऐसा है भारत में जिसके दाह-संस्कार से दो परस्पर विरोधी एकमत होकर खुश होते हैं

दीर्घकाल से संन्यास शब्द अकर्मण्य लोगों की निष्क्रियता, निठल्लापन, पलायन, गैरजिम्मेदार जीवन-यापन, परावलंबन, पाखंड का प्रतीक बनकर रह गया है

चारों तरफ हजारों लोग हैं और तुम उनका अनुसरण कर रहे हो। और इसी अनुसरण से तुम्हारे व्यक्तित्व का निर्माण हो रहा है। और इसी व्यक्तित्व को तुम अपनी आत्मा समझे हुए हो

उन्होंने छुआ-छूत और ब्राहमण व शूद्रों के लिए अलग अलग बैठकर प्रसाद लेने की परम्परा बंद करवा दी और सभी को एक ही साथ बैठकर बिना कोई भेद-भाव प्रसाद लेने की परम्परा को लागू किया

यह बात सभी को गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि भारत विभिन्न मतों, मान्यताओं, संस्कारों, परम्पराओं, भाषाओँ, संस्कृतियों का देश है | कोई इस्लामिक, इसाई, या बौद्ध देशों की तरह एकल संस्कृति व भाषा का देश नहीं है

अक्सर हम सुनते हैं कि धर्म खतरे में हैं | गली मोहल्लों से लेकर विश्वस्तर पर धर्म रक्षक बने लुच्चे लफंगों की सेनाएं तैनात हो रहीं हैं | हर किताबी रट्टामार धार्मिक इस बात पर बहुत ही गंभीरता से विश्वास करता है कि धर्म खतरे…

अभी मुझे वैज्ञानिक सोच के पढ़े-लिखे मित्र का यह पोस्ट पढने को मिला: मकर संक्रांति का औचित्य ??? लकीर के फकीरों के लिए मकर एक राशि है और संक्रांति का अर्थ है-गति।प्राचीन खगोल विज्ञानियों ने सूर्य के मार्ग को 12 भागों में बांटा था।इस मार्ग…

किसी ने ओशो से कहा कि वह जिंदगी से तंग आकर आत्महत्या करना चाहता है, इस पर ओशो बोले- तुम सूइसाइड क्यों करना चाहते हो? शायद तुम जैसा चाहते थे, लाइफ वैसी नहीं चल रही है? लेकिन तुम ज़िन्दगी पर अपना तरीका, अपनी इच्छा थोपने…

लोग कार्लमार्क्स, बुद्ध, जीसस या अन्य किसी भी महान व्यक्तित्व के अनुयाई (follower) बनकर समझते हैं कि उन्होंने कोई महान कार्य कर लिया | जबकि उन्होंने सिवाय जय जय करने के, एक नया सम्प्रदाय खड़ा करने के कुछ नहीं किया

पिछले दो दिनों से कुछ भी लिखने का मन नहीं कर रहा…यहाँ तक कि जब अभी मुझे पता चला कि हमारे गाँव में एक पंद्रह वर्षीय लड़के ने फाँसी लगाकर केवल इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि वह एक नौ-दस साल उम्र की लड़की से प्रेम…